चेन्नई की सबसे बड़ी टेंशन बना MS Dhoni का बल्लेबाजी क्रम
चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने IPL 2026 के लिए अपनी तैयारियां काफी पहले शुरू कर दी थीं। पिछले दो सीजन से प्लेऑफ में जगह न बना पाने के बाद टीम इस बार किसी भी तरह वापसी करना चाहती है। टीम के दिग्गज एमएस धोनी और कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ लगातार प्रैक्टिस सेशंस में नजर आए, जिससे साफ है कि टीम इस सीजन को हल्के में नहीं ले रही। हालांकि इस बार टीम का चेहरा बदला हुआ है। रवींद्र जडेजा और सैम करन जैसे बड़े नाम टीम का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन युवाओं पर भरोसा जताया गया है।
ताकत: ऑलराउंडर्स और मजबूत बल्लेबाजी
सीएसके की सबसे बड़ी ताकत इस बार उसके पास मौजूद बहुमुखी प्रतिभाएं हैं। 25 खिलाड़ियों में से 11 ऐसे हैं जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में योगदान दे सकते हैं। शिवम दुबे, जेमी ओवरटन, अमान खान जैसे खिलाड़ी तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर के रूप में टीम को संतुलन देते हैं, जबकि स्पिन विभाग में प्रशांत वीर, अकील होसेन और श्रेयस गोपाल जैसे विकल्प मौजूद हैं। बल्लेबाजी की बात करें तो टीम इस बार काफी मजबूत नजर आती है। पिछले सीजन में गायकवाड़ की गैरमौजूदगी में टीम संघर्ष करती दिखी थी, लेकिन अब संजू सैमसन और सरफराज खान के जुड़ने से गहराई बढ़ी है। इसके अलावा प्रशांत वीर और कार्तिक शर्मा जैसे विस्फोटक हिटर्स भी हैं। टॉप ऑर्डर में गायकवाड़, सैमसन और युवा आयुष म्हात्रे जैसे खिलाड़ी हैं, जबकि मिडिल ऑर्डर में दुबे, डेवाल्ड ब्रेविस और धोनी जैसे अनुभवी नाम मौजूद हैं।
कमजोरी: गेंदबाजी और धोनी का रोल चिंता
चेन्नई की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी गेंदबाजी मानी जा रही है। टीम में अनुभव की कमी है और कई खिलाड़ी चोट से जूझते रहे हैं। खलील अहमद और मैट हेनरी नई गेंद से अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन डेथ ओवर्स में टीम के पास सीमित विकल्प हैं। टीम के पास नाथन एलिस के रूप में विकल्प था, लेकिन एलिस चोट की वजह से सीजन से बाहर हो गए। ऐसे में हेनरी और खलील के साथ ही जाना पड़ सकता है। अंशुल कंबोज तीसरे पेस गेंदबाज हो सकते हैं।
अगर सीएसके अगर पहले बल्लेबाजी करता है तो अंशुल को खलील पर तरजीह दी जा सकती है और शुरुआती प्लेइंग-11 में शामिल किया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह बल्लेबाजी भी लेते हैं। खलील को इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर लाया जा सकता है। वहीं, अगर सीएसके की पहले गेंदबाजी आती है तो किसी एक बल्लेबाज को बैठाकर अंशुल और खलील दोनों को मौका दिया जा सकता है।
इसके अलावा, धोनी का बल्लेबाजी क्रम भी बड़ा सवाल बना हुआ है। पिछले कुछ सीजनों में वह केवल फिनिशर की भूमिका निभा रहे हैं और ज्यादा देर तक बल्लेबाजी नहीं करते। ऐसे में अगर जल्दी विकेट गिरते हैं तो टीम दबाव में आ सकती है। जिस तरह की बल्लेबाजी लाइन अप सीएसके के पास है, वैसे में धोनी का बल्लेबाजी क्रम तय नहीं है। वह आठवें नंबर पर आते दिख रहे हैं।
एक और जो समस्या सीएसके के पास है, वह है चार विदेशी खिलाड़ियों को खिलाने की। एलिस चोटिल हैं। ऐसे में हेनरी, नूर और ब्रेविस का खेलना तय है। अब सीएसके के पास कई भारतीय टैलेंट हैं। ऐसे में किसी चौथे विदेशी की जगह बनती नहीं दिख रही है। अन्य जो विकल्प हैं, उनमें अकील हुसैन, जैक फॉक्स, मैट शॉर्ट (शुरुआती कुछ मैचों में नहीं खेलेंगे) और जेमी ओवरटन शामिल हैं। चेन्नई को शुरुआती लेग में चार में से दो मैच चेन्नई में और एक-एक मैच गुवाहाटी और बंगलूरू में खेलने हैं। ऐसे में चेन्नई लेग के लिए टीम तीन स्पिनर्स के साथ उतर सकती है। नूर-वीर के अलावा टीम राहुल चाहर और श्रेयस गोपाल में से किसी एक को मौका दे सकती है। हेनरी को इस स्थिति में बाहर बिठाया जा सकता है।
अवसर: युवाओं के लिए बड़ा मंच
चेन्नई के लिए हमेशा से खिलाड़ियों को नया जीवन देने के लिए जानी जाती है। राहुल चाहर के पास खुद को साबित करने का अच्छा मौका है। इसके अलावा प्रशांत वीर और कार्तिक शर्मा जैसे युवा खिलाड़ी इस सीजन में अपनी पहचान बना सकते हैं। इन दोनों को सीएसके ने 14.2 करोड़ की भारी भरकम राशि देकर अपनी टीम में शामिल किया है। अगर ये खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो टीम का भविष्य काफी मजबूत हो सकता है।
खतरा: चोट और अनुभव की कमी
सीएसके के लिए सबसे बड़ा खतरा चोटें हैं। पिछले कुछ सीजनों में टीम को इस समस्या से जूझना पड़ा है और इस बार भी कई खिलाड़ी फिटनेस के लिहाज से जोखिम में हैं। साथ ही, टीम ने कुछ खिलाड़ियों पर बड़ा दांव खेला है, जिनका अनुभव सीमित है। अगर ये खिलाड़ी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करते, तो टीम को नुकसान उठाना पड़ सकता है। म्हात्रे हाल फिलहाल में अच्छी फॉर्म में नहीं दिखे हैं। साथ ही टीम बिल्कुल नई है और ऐसे में शुरुआती कुछ मैचों में सही प्लेइंग-11 चुनना भी एक बड़ी चुनौती होगी। टीम में पावर हिटर्स की भरमार है। कोई एक गलत फैसला, टीम को नुकसान पहुंचा सकती है।
वापसी की राह पर CSK
चेन्नई के लिए आईपीएल 2026 एक बदलाव और परीक्षा का सीजन है। टीम के पास प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन अनुभव और संतुलन की चुनौती जरूर है। धोनी की मौजूदगी टीम के लिए सबसे बड़ा सहारा है, लेकिन असली जिम्मेदारी अब गायकवाड़ और युवाओं पर होगी।अगर टीम अपनी कमजोरियों पर काबू पा लेती है, तो छठा खिताब जीतने का सपना भी हकीकत बन सकता है।
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